रामनगर की रामलीला: वाराणसी की सदियों पुरानी परंपरा

माना जाता है कि भारत एक ऐसा देश है जहाँ कदम-कदम पर संस्कृतियों के विविध रूप देखने को मिलते हैं। यहाँ प्रत्येक क्षेत्र की अपनी विशिष्ट लोककथाएँ और परंपराएँ हैं, जो देश की सांस्कृतिक समृद्धि दर्शाती हैं। 

वाराणसी की ‘रामनगर रामलीला’ भारत की गौरवशाली विरासत का एक अनूठा उदाहरण है। यह देशवासियों के साथ-साथ विदेशियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है।

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रामलीला के बारे में

दुनिया की सबसे पुरानी और सबसे बेहतरीन मानी जाने वाली ‘रामनगर की रामलीला’, वाराणसी में 31 दिनों तक होती है। इस दौरान, पूरा शहर भगवान राम की गाथा जन-जन तक पहुँचाने के लिए एक मंच में बदल जाता है।

200 साल पुरानी यह परंपरा, आज भी बिना किसी तकनीक की मदद से निभाई जाती है। कलाकार दृश्यों को प्रभावशाली बनाने के लिए अपनी आवाज़ का बहुत बुद्धिपूर्वक उपयोग करते हैं और माइक्रोफ़ोन आदि पर निर्भर नहीं होते हैं।

रामलीला की तिथि एवं स्थान

9 सितंबर 2019 – 8 अक्टूबर 2019

रामनगर, वाराणसी

महत्वपूर्ण परंपराएँ 

रामलीला की शुरुआत काशी नरेश के आगमन से होती है। उनका स्वागत ‘हर हर महादेव’ के जयघोष द्वारा किया जाता है। कुछ समय पश्चात राम और लक्ष्मण भी भव्य और शानदार तरीके से नाटक में शामिल होते हैं।

शहर भर में हाथियों और नर्तकों के साथ भव्य और विशाल जुलूस निकाला जाता है। रामलीला के इस रंगीन और अनोखे आयोजन में पर्यटक भी भाग ले सकते हैं।

रामलीला का महत्व

रामचरितमानस के विभिन्न पहलुओं को दर्शाती हुई रामनगर की रामलीला का नाटकीय प्रदर्शन 31 दिनों से अधिक समय तक होता है। बनारस की इस विरासत को यूनेस्को ने भी उत्कृष्ट कृति का दर्जा प्रदान किया है, यह आयोजन हर साल दुनिया भर से पर्यटकों को आकर्षित करता है।

तो इस दशहरा, दुनिया के सबसे प्राचीन शहर की इस अद्भुत परंपरा का हिस्सा बनें और हमारी सांस्कृतिक समृद्धि का अनुभव करें।

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